औरत की नमाज का तरीका Aurat Ki Namaz Ka Tarika Full Free

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इस्लाम धर्म की जानकारी

🌟बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम🌟

हमें और पूरी कायनात को अल्लाह ने पैदा किया है। जिन्दगी गुज़ारने के लिए हमें जितनी चीज़ों की ज़रूरत है, वे सब उसी ने प्रदान की है। ज़िन्दगी और मौत उसी के हाथ में है। वही पालनहार है। रोज़ी-रोटी उसी के दिए मिलती है। दुआओं को सुनने वाला, मुसीबत में मदद करने वाला वही है। उसके अलावा कोई हमें नफ़ा या नुक्सान पहुंचाने की ताक़त नहीं रखता।

दुनिया में जो कुछ है उसका हक़ीकी मालिक अल्लाह ही है। हाकिम भी वही है, दुनिया का यह कारखाना उसी के चलाये चल रहा है। उसका कोई शरीक नहीं, न जात में, न सिफ़ात में और न इख़्तियारात में मरने के बाद हमारी ज़िन्दगी का हिसाब भी वही लेगा और अमल के मुताबिक़ बदला देगा

हम इन्सानों की रहनुमाई और हिदायत के लिए ख़ुदा ने अपने रसूल और पैग़म्बर भेजे। इन पैग़म्बरों ने ख़ुदा की मर्जी के मुताबिक़ ज़िन्दगी गुज़ारने का ढंग लोगों को बताया सबसे आखिर में ख़ुदा ने हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) को अपना आखिरी रसूल बनाकर भेजा और उनके ज़रिए हमारी पूरी रहनुमाई और हिदायत का सामान किया।

वास्तव में यही हिदायत है जिसे इस्लाम कहते हैं। इस्लाम के मायने ही हैं अपने को ख़ुदा के हवाले करना और उसका कहा मानना । इस्लाम की तालीम है कि बन्दगी सिर्फ़ ख़ुदा की की जाए।

ख़ुदा ही को अपना माबूद बनाया जाए, उसी की पूजा और इबादत की जाए, किसी और के आगे अपना सिर न झुकाया जाय और पूरी ज़िन्दगी ख़ुदा की गुलामी और ताबेदारी में गुजारी जाय।

इन बातों को हमेशा ज़हन में याद रखने, ख़ुदा की बन्दगी का हक़ अदा करने, उसके एहसानों का शुक्र अदा करने, ख़ुदा के सामने बन्दा और गुलाम होने के इज़हार और ख़ुदा की बड़ाई और हुकमरानी का इक़रार करने के लिए इस्लाम ने जो इबादती निज़ाम पेश किया है उसमें एक अहम इबादत नमाज़ है।

नमाज़ की अहमियत और ज़रूरत का ज़िक्र कुरआन और हदीस में बेशुमार जगहों पर हुआ है। दिन में पांच बार नमाज़ पढ़नी हर मुसलमान मर्द और औरत पर फ़र्ज़ है। किसी मुसलमान के लिए नमाज़ का छोड़ना सख्त गुनाह की बात है

औरत की नमाज का तरीका | Aurat Ki Namaz Ka Tarika

औरतों पर भी नमाज़ पढ़नी फ़र्ज़ है। हां महीने और जदगी के ख़ास दिनों में नमाज़ पढ़नी मना है। इन दिनों में जो नमाज़े छूटेंगी उनकी क़ज़ा भी नहीं पढ़नी होगी। औरतों के नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा वही है जो मर्दों के पढ़ने का है, लेकिन कुछ चीज़ों में फ़र्क है। औरतों की नमाज़ के सिलसिले में ख़ास बातें ये हैं जिनका ख़याल औरतों को रखना चाहिए।

  • औरतों को नमाज इस तरह शुरू करना चाहिए
  • मुँह, हाथ और पैरों के अलावा सारा जिस्म को अच्छी तरह ढांपना चाहिए।
  • औरतें नमाज की नीयत पहले करें
  • फिर पहली बार अल्लाहु अकबर कहते वक़्त अपने हाथों को दुपट्टे या चादर से बाहर निकाले बिना सीने तक उठायें और दुपट्टे के अन्दर ही हाथ बांधे
  • हाथों को सीने पर इस तरह बायें कि दाहिने हाथ की हथेली बायें की पुश्त पर हो।
  • रुकू में बस इतना ही झुकें कि हाथ घुटनों तक पहुँच जायें।
  • हाथ की उंगलियां मिलाकर घुटनों पर रखें।
  • कोहनियां पहलू से मिली रहे और टखने एक दूसरे से जुड़े हुये हों।
  • सज्दा करने से पहले दोनों पैर दाहिनी तरफ निकाल लें।
  • इस तरह कि दाहिनी पिंडली बायीं पिंडली पर आ जाये।
  • रार्ने मिली रहे। पिछला हिस्सा ज़मीन पर रहे।
  • इसके बाद सज्दा करना चाहिए और सज्दे के बाद इसी तरह बैठना भी चाहिए।
  • सज्दे में पेट, रान से, बाजू बराल से मिले हों। कोहनियां ज़मीन पर बिछी हों और खूब सिमटकर सज्दा करें।
  • नमाज़ में जो पढ़ना है आहिस्ता आहिस्ता पढ़ें।
  • औरतें नमाज़ घर ही में बग़ैर जमाअत के पढ़ें उनके लिए यही मुनासिव है।
  • बेहतर यह है कि नमाज़ घर के किसी कोने में अद करें।

[फर्ज] फजर की नमाज का टाइम | औरत की नमाज का तरीका

दिन भर में पांच वक़्त की नमाज़ फ़र्ज़ है औरत और मर्द दोनों ही पांच वक्त की नमाज अदा करें जो निम्नवत है:-

  • फज्र सवेरे पौ फटने के बाद से सूरज निकलने से पहले तक।
  • जुहर दोपहर को सूरज ढलने के बाद।
  • अस्र या असर जुहर की नमाज़ का वक़्त ख़त्म हो जाने के बाद और – सूरज डूबने से पहले तक।
  • मगरिब सूरज डूबने के बाद से पश्चिम की तरफ आसमान पर लाली रहने तका
  • इशा मगरिब की नमाज़ का वक़्त ख़त्म हो जाने के बाद सुबह पौ फटने तक

नमाज रकात टेबल | Aurat Ki Namaz Ka Tarika

औरत एंव मर्द दोनों के लिए नमाज का वक्त, रकात, नमाज का टाइम टेबल निम्नलिखित है:-

नमाज वक्तनमाज रक्आतसुन्नतफर्जसुन्नतनफ्लवाजिब
फज्र040202🌟🌟🌟
जुहर1204040202🌟
अस्र080404🌟🌟🌟
मगरिब07🌟030202🌟
ईशा174+204020203 वित्र
namaz rakat table | नमाज रकात टेबल